जलती है,सूखती है,मरती है,कुचली जाती है जिजीविषा हरी दूब सी है फिर उग आती है
दीवाली पर कुछ घरों में दिखते हैं छोटे छोटे प्यारे प्यारे मिट्टी के घर माँ से पूछते हम क्यों नहीं बनाते ऐसे घर? माँ कहतीं हमें विरासत में नह...
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