अलग होकर भी
पत्थर पहाड़ से
अकड़ में रहता है
सजूँगा मंदिर में
चढूँगा चाक पर
लुढ़कने से लेकर
छेनी के आघात तक
क्या क्या सहना होगा
अलग होते समय
सोचता नही है
माता पिता से
बिछड़कर मैंने भी
कब सोचा था ?
टि्वंकल तोमर सिंह
दीवाली पर कुछ घरों में दिखते हैं छोटे छोटे प्यारे प्यारे मिट्टी के घर माँ से पूछते हम क्यों नहीं बनाते ऐसे घर? माँ कहतीं हमें विरासत में नह...
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