Friday, 1 May 2020

श्रम स्वेद


तृषा जब जब 
विकल करती है
ईश्वर के भी कंठ को

शुष्क मृदा अणु बन 
बिछ जाता है श्रमिकों के
सख्त सांवले पंजों तले

श्रम स्वेद से अधिक पवित्र,
सुस्वादु....तृप्तिदायक
कोई ओस नहीं होती !

टि्वंकल तोमर सिंह,लखनऊ।

चित्र : साभार गूगल 


Friday, 17 April 2020

परिवाद

आह!
अच्छा होता यदि
ईश्वर की भी 
कोई माँ होती
उसे समझा सकती
अपने से छोटे बच्चों को
क्रीड़ा-वस्तु देकर 
छीन नहीं लिया करते

हम भी परिवाद कर सकते
बड़ी माँ, दद्दा बहुत निष्ठुर हैं !


टि्वंकल तोमर सिंह,लखनऊ। 

चित्र : साभार गूगल



Thursday, 16 April 2020

नटखट शैतान

पटाक........... कुछ गिरने की आवाज़ आयी। दोपहर में कामकाज निपटाने के बाद मम्मी की आँख लगी ही थी कि नींद टूट गयी। मम्मी हड़बड़ा कर उठी , अंदाज़ लगाया कि शायद रसोई से ही कुछ गिरने की आवाज़ आयी थी।  फौरन रसोई की ओर भागी।


रसोई का नज़ारा ही कुछ और था। एक तरफ स्टूल ढुलका पड़ा था, एक तरफ सौम्या। फर्श पर ढेर सारा सामान फैला था जो कि शायद ऊपर की अलमारी से गिरा था। मम्मी को माज़रा समझते देर न लगी। सौम्या को झट से उठाया। सौम्या एकदम हड़बड़ाई सी खड़ी थी। "मम्मी वो...मम्मी वो.."


वो कुछ इसके आगे बोलती इसके पहले ही मम्मी ने कस कर उसे एक चाँटा जड़ दिया। " नालायक, इतनी चीज़ें टाइम से सब खाने पीने की देती रहती हूँ। फिर भी तेरा पेट नहीं भरता। अब तुम चुरा कर खाने की आदत डाल रही हो? "



"नहीं मम्मी...नहीं,...प्लीज़ मेरा विश्वास करो मैं चुरा नहीं रही थी।" सौम्या ने रोते हुए कहा।



"चुरा नहीं रही थी... तो इस समय यहाँ क्या कर रही हो? स्टूल कौन लाया यहाँ? समान कैसे बिखरा ? " मम्मी ने गुस्से में दो चार चाँटे और लगा दिए।



अब तो सौम्या का बाँध टूट गया। आठ साल की सौम्या , नन्ही सी फूल सी सौम्या के गाल थप्पड़ खाने की वजह से लाल पड़ गए थे। " मम्मी वो ...मम्मी...मैं...." सौम्या की हिचकियाँ बंध गयीं। पर वो कुछ भी कह नहीं पाई। आख़िर गलती तो हुई ही थी उससे।



"चलो अब भागो यहाँ से, अपने कमरे में जाओ। मुझे समेटने दो ये सब। और शाम तक अब मुझे अपना मुँह मत दिखाना। चोरी करके खाएगी.....आने दो पापा को शाम को सब बताती हूँ।" मम्मी गुस्से में बड़बड़ाती हुई फर्श पर बिखरा हुआ समान समेटने लगीं।



सौम्या चुपचाप अपने गाल को एक हाथ से सहलाती हुई अपने कमरे में चली गयी। सुबकते सुबकते कब सो गई पता ही नहीं चला। शाम को जब पापा ने उसे आवाज़ दी तब उसकी आँखे खुलीं। जैसे ही वो उठ कर बैठी उसे दोपहर की घटना उसे याद आ गयी। उसे लगा कि अब तक तो मम्मी ने पापा को सब कुछ बता दिया होगा और शायद पापा उसे डाँटने के लिये ही बुला रहे होंगे।



सौम्या उठी और फट से अपनी डेस्क पर बैठ कर पढ़ने का नाटक करने लगी। तभी पीछे से पापा आ गए। " क्या हुआ मेरा राजा बेटा। आज पापा से मिलने नहीं आया। वैसे तो तुरंत दौड़ कर आ जाता है।" पापा के नरम प्यार भरे शब्दों को सुनकर सौम्या खुश हो गयी। तुरंत पापा के गले लग गयी।



" अच्छा तो मम्मी ने पापा को कुछ नहीं बताया।" सौम्या ने मन में सोचा।



पापा के साथ जब सौम्या बाहर आई तो देखा मम्मी मुस्कुराते हुये चाय नाश्ता मेज पर लगा रहीं थीं। सौम्या ने डरते डरते मम्मी की तरफ देखा। पर मम्मी को तो जैसे कुछ याद ही नहीं था। सब कुछ पहले जैसा ही नार्मल था। "लगता है अभी तुरन्त मम्मी पापा को कुछ नहीं बता रहीं है, क्योंकि पापा अभी अभी वापस आये है। शायद थोड़ी देर में बता दें।" सौम्या के दिल में धुकधुकी लगी हुई थी।




नाश्ता करने के बाद सौम्या अपने कमरे में चली गयी। उसके कान बाहर से आती मम्मी पापा की आवाज़ पर ही लगी हुये थे। पर आश्चर्य.... मम्मी ने तो उसकी कोई भी शिकायत नहीं की। शायद मम्मी दोपहर की बात भूल गयी है। या शायद उन्होंने उसे माफ़ कर दिया। शायद अब वो नाराज़ नहीं है। " चलो अच्छा हुआ...." सौम्या ने राहत की साँस ली।



दूसरे दिन सौम्या जब सुबह उठी तो मम्मी के कमरे की तरफ भागी। आज उसकी मम्मी का जन्मदिन था। कल दोपहर में जब मम्मी ने उसे चाँटा मारा था तो उसने सोचा था कि वो मम्मी को विश भी नहीं करेगी। पर जब शाम को सब कुछ नार्मल हो गया तो उसने मम्मी के लिये एक कार्ड भी बनाया था और एक गिफ़्ट भी तैयार किया था।



मम्मी अभी अभी नहा कर बाथरूम से निकलीं थीं। " हैप्पी बर्थडे मम्मी।" इतना कहकर सौम्या मम्मी के गले लग गयी।



" थैंक्यू बेटा। " मम्मी ने इतना कहकर सौम्या को गोद में उठा लिया। फिर सौम्या ने मम्मी के हाथ में कार्ड थमा दिया।




" अरे वाह, मेरी राजकुमारी ने कार्ड बनाया है। इट्स ब्यूटीफुल, बेबी।" मम्मी चहक उठीं।



"और एक गिफ़्ट भी है मम्मी।"



"क्या?"



"पहले आँख बंद करो।" सौम्या ने कहा।



मम्मी ने आँखें बंद की। सौम्या ने उनके गले में एक माला पहना दी। मम्मी ने जब आँखें खोली तो पाया एक छोटी सी रंग बिरंगी माला उनके गले में थी.....मैक्रोनी की !



" ये ....ये कैसे बनाया?....इसका आईडिया कहाँ से आया ? ये तो बहुत प्यारी है।" मम्मी ने आश्चर्य से पूछा।



" लॉक डाउन था न मम्मी तो बाहर जा नहीं सकते थे ,आपके लिये गिफ़्ट लेने। इसलिए मैंने घर में ही बना लिया। " सौम्या ने मासूमियत से कहा।



"अच्छा तो तुम मैक्रोनी लेने ही रसोई में गयी थी। अरे मेरी रानी बेटी....और मैंने तुमको बिना सोचे समझे कितना मारा। मुझे माफ़ कर दो बच्चा। " मम्मी के आँखों में आँसू झिलमिला उठे। उन्होंने उसके नन्हे नन्हे हाथों को चूम लिया। सौम्या ने उन्हीं छोटे छोटे हाथों से मम्मी के गालों पर लुढकते आँसू पोछे और उनको चूम लिया।




कभी कभी बच्चे कुछ क्रिएटिव करना चाहते हैं, पर माता पिता उसे भी शैतानी ही समझ लेते हैं।





टि्वंकल तोमर सिंह,
लखनऊ। 

Wednesday, 15 April 2020

लॉक डाउन

काश कि कुछ दिन उम्र पर भी लॉक डाउन लग जाता
बीतती जा रही है, हर दिन एक नयी उदासी थमा कर
® टि्वंकल तोमर सिंह,लखनऊ। 

Saturday, 28 March 2020

लॉक डाउन वाला लव

रौनक कभी गेट के बाहर देखता, कभी सड़क पर थोड़ी देर खड़ा रहता, कभी छत पर चला जाता। कुछ उसको परेशान कर रहा था। लॉकडाउन का तीसरा दिन था। सड़कों पर कर्फ्यू की जैसी स्थिति थी। कोई कहीं नहीं आ जा रहा था। 

कल रोहन की पत्नी वैशाली का जन्मदिन था। शादी के बाद पहला जन्मदिन। कहाँ उसने सोच रखा था कि बड़ी धूम धाम से मनायेगा, और कहाँ ये वायरस आपदा के चलते सब कुछ बन्द था। केक, कैंडल्स, एक अच्छा सा गिफ़्ट, बढ़िया डिनर...सारे प्लान उसके धरे के धरे रह गए। 

छत पर उसने शाम को ढलते हुये सूरज को देखा। उसने जेब से एक सिगरेट निकाली और उसे जलाकर फूँकने लगा।    अपनी बेबसी पर उसे इतना मलाल कभी नहीं हुआ। क्या करे? कैसे सरप्राइज़ दे अपनी नई नवेली दुल्हन को। क्या कर दे कि उसे ससुराल में अपना ये पहला जन्मदिन सदा के लिये याद रह जाये। 

उसे याद आया अभी पिछली सर्दी में ही उसका जब जन्मदिन पड़ा था, वैशाली ने कितने अच्छे से सेलिब्रेट किया था। उसके दोस्तों को घर पर इनवाइट किया था। पूरा खाना ख़ुद बनाया था। उसकी पसंद का मूँग का हलवा वैशाली घंटों खड़े होकर भूनती रही थी। और तो और उसने अपनी थोड़ी सी सेविंग के पैसों से एक कुर्ता भी खरीद कर दिया था। 

तभी उसका एक हाथ अपने कुर्ते के कॉलर पर चला गया। " यही कुर्ता तो है ये वो।" उसे पसंद कम था, पर क्योंकि वैशाली का प्यार था इसमें इसलिए उसने ख़ूब पहना। सिगरेट फूँकने से भी उसकी समस्या का कोई समाधान नहीं मिल रहा था। हताश होकर उसने सिगरेट बुझा कर एक कोने में फेंक दी। 

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घड़ी ने रात के पौने बारह बजने का इशारा किया। रौनक धीरे से उठा। छत पर जाकर उसने सारी तैयारी कर दी। फिर नीचे धीरे से आकर आधी नींद में सोती हुई सुंदर सी पत्नी को जगाया। " हैप्पी बर्थडे स्वीट हार्ट।" इतना कहकर उसके माथे को चूम लिया। वैशाली अचकचा कर उठी। फिर लज्जा गयी। 

रौनक ने उसका हाथ पकड़ा और उसे छत पर चलने का इशारा किया। दोनों दबे पाँव छत की तरफ चले। रौनक के मम्मी पापा दूसरे कमरे में सो रहे थे। वो नहीं चाहता था कि वो लोग जग जायें। 

छत पर हल्की हल्की रोशनी थी। एक मेज के ऊपर कोई केक सा रखा था और बीच में एक कैंडल जल रही थी। वैशाली ने पास जाकर देखा तो ये केक नहीं ये तो गाजर का हलवा था जिसे गोल आकार में सजा कर रखा गया था। 

"अच्छा जी, तभी पापाजी ने पूरा फ्रिज़ छान डाला और उन्हें गाजर का हलवा कहीं नहीं मिला। सभी ये सोच रहे हैं किसी दूसरे ने खा लिया होगा। " वैशाली की हँसी नहीं रुक रही थी। 

" क्या करता वैशाली? और कुछ था ही नहीं , तो अपने ही घर में चोरी करनी पड़ी मुझको।" 

"पर ये क्यूट सा चोर मुझे बहुत पसंद है।" वैशाली ने गाजर के हलवे का केक काटकर रौनक के मुँह में डाल दिया। 

रौनक ने भी थोड़ा सा गाजर का हलवा वैशाली को खिला दिया। इसके बाद रौनक ने अपनी जेब से एक पैकेट निकाला और वैशाली को दिया। 

वैशाली की आँखे हल्की रोशनी में भी चमक रहीं थीं। उसके होठों पर मुस्कान थिरक रही थी। पर जैसे ही उसने वो पैकेट खोला उसकी मुस्कान गायब हो गयी। आँखों में आश्चर्य दीप्त हो गया। 

" ये ...? ये क्या...? इसका मैं क्या करूँगी?" वैशाली ने पूछा। 

"इसे तुम्हें संभाल कर रखना है। ये मेरी सबसे प्यारी चीज़ है। जानती हो न जबसे कॉलेज जा रहा हूँ तब से ये हमेशा मेरे पास रहती है।" 

" जानती हूँ। पर तुम ये भी तो जानते हो ये मेरी सौत है। और मुझे बिल्कुल पसंद नहीं।" 

" जानता हूँ। तभी तो तुम्हारे पहले जन्मदिन पर इतना अनमोल तोहफ़ा दिया है। जाओ आज से तुम्हारी सौत को होठों से लगाना बंद। मुझे तुम्हारी कसम है। अब मुस्कुरा भी दो।" रौनक ने वैशाली के सर पर हाथ रख कर प्यार से उसे देखते हुये कहा। 

वैशाली की आँखों में आँसू झलक आये। सगाई के बाद से ही जब से पता चला था वैशाली रौनक से कहती रही थी सिगरेट छोड़ दो। पर रौनक अपनी लत छोड़ ही नहीं पाता था। 

वैशाली को भी इतने प्यारे गिफ्ट की उम्मीद नहीं थी। वो खिलखिलाकर रौनक के गले लग गयी। 

लॉकडाउन के कुछ फायदे भी होते हैं भई। 

टि्वंकल तोमर सिंह,लखनऊ। 

Wednesday, 18 March 2020

पत्थर

अलग होकर भी
पत्थर पहाड़ से
अकड़ में रहता है
सजूँगा मंदिर में
चढूँगा चाक पर

लुढ़कने से लेकर 
छेनी के आघात तक
क्या क्या सहना होगा
अलग होते समय
सोचता नही है

माता पिता से 
बिछड़कर मैंने भी
कब सोचा था ?

टि्वंकल तोमर सिंह 


Thursday, 12 March 2020

मशकबीन

माना कि
जाने देना 
सदा से आसान रहा है
मशकबीन पर
वापस बुला लेने वाली 
संगीत-लहरी छेड़ने से 

अपने अंदर के
उस छोटे से 
छटपटाते हिस्से को
कैसे उत्तर देते हो
जो फुसफुसाता रहता है
'रोका क्यों नहीं?'

© ® टि्वंकल तोमर सिंह,लखनऊ। 

रेत के घर

दीवाली पर कुछ घरों में दिखते हैं छोटे छोटे प्यारे प्यारे मिट्टी के घर  माँ से पूछते हम क्यों नहीं बनाते ऐसे घर? माँ कहतीं हमें विरासत में नह...